शिव तांडव स्तोत्र हिंदी अर्थ के साथ
नमामि शंकरं आचार्यं च अचार्यं च परं तपः। तस्मै नमः तस्मै नमः शिवायै गुरवे च नमः॥ मैं शंकर को नमस्कार करता हूँ, जो गुरुओं का गुरु है, अचार्यों का अचार्य है और परम तपस्वी है। मैं उस शिव को नमस्कार करता हूँ, जो गुरु के रूप में है और शिव के रूप में भी॥ मौलीभवंगौलिमनोहारिणं मनोजवं मारुततुल्यवेगम्। जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्, वातात्मजं वानरयूथमुख्यम्॥ हे मौलीभूषण धारण करने वाले, भक्तों के मन को मोहित करने वाले, मनोजव के समान तेजस्वी, हवा की गति के समान तेज और इंद्रियों को वश में करने वाले, बुद्धिमानों के प्रमुख, पवनपुत्र हनुमान के समान मुख्य॥ श्रीमद्गौरीसुते गणेशाये नमः॥ मैं श्रीमद्गौरी के पुत्र गणेश को नमस्कार करता हूँ॥ जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवं॥ हे जटाधारी शिव, जिनके जटाओं में झूलती हुई सर्पों की माला है, जिनकी भुजाएं लम्बी हैं, और जिनके डंठल पर लोहे की डंडी है, वे शिव हमारे लिए ताण्डव नृत्य करें॥ जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिम्पनीलतकण्ठकेयूरकेलिकण्ठं। विषाललोचनं प्रच...